शिकारी अभिनेता सलमान खान पर काले हिरण का ग्रहण !

हम साथ -साथ हैं  के  6 आरोपी में से कोई नहीं सिर्फ  ‘ सलमान’ 

Jaipur –  सलमान खांन का दिन खराब हो जाता है जब कोई काला हिरण का जिक्र कर देता है। यह लोकप्रिय अभिनेता काले हिरण के कारण विगत दो दशक से न्यायालय के चक्कर काट रहा है और आज अंततः सलमान खान को जोधपुर की अदालत में मुख्य न्याययिक दण्ंडाधिकारी देवकुमार खत्री ने 05 साल की सजा व 10 हजार रुपया जुर्माना की सजा सुनाई। ज्ञातब्य है कि राजस्थान के जोधपुर में दो चिंकारों,काला हिरन का शिकार करने का आरोप सलमान सहित 6 लोगों पर था। वर्ष 1998 में बनी फिल्म ‘हम साथ -साथ हैं‘ के निर्माण के दौरान ये घटना हुई थी। इसमें अन्य कलाकार सैफ अली खान, सोनाली बेन्द्रे, नीलम, तब्बू तथा एक उद्योगपति दुष्यंत कुमार आरोपी थे। सलमान के अतिरिक्त सभी आरोपियों को कोर्ट से राहत मिल गई है, उन्हे कोर्ट ने दोषी नहीं पाया है। इन पर वाइल्डलाईफ प्रोटेक्शन की धारा 51 के तहत कार्यवाही विश्नोई समाज की शिकायत पर 20 वर्ष पूर्व की गई थी।
यह घटना 26 सितम्बर 1998 की है। आरोप और भी गम्भीर तब होते गये जब यह घटना लगातार हो गई। उक्त घटना के दो दिन बाद यानी 28 सितंबर 1998 को सलमान खान नें घोड़ा फार्म्स में एक और ब्लैक बक का शिकार किया। 2 अक्टूबर 1998 को बिश्नोई समुदाय ने सलमान खान के खिलाॅफ मामला दर्ज कराया और दस दिन बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया । जमानत फिर उन्हेें जमानत मिली और मुकदमा शुरु हुआ। राजस्थान, जोधपुर में तभी से ये मामला अदालत में विचाराधीन था। आज उन्हें दोषी करार दे दिया गया।
आइये समझते हैं कि देश का जाना माना अभिनेता इस केश में आरोपित हुआ सजा हुई ; इसलिये यह मामला इतना महत्वपूर्ण है या  ‘काला हिरण’  का भी कोई राष्टृीय महत्व है ?
कहां पाये जाते हैं काले हिरण ?
काले हिरण या ‘ब्लैक बक‘ को ‘इंडियन एंटेलोप‘ भी कहा जाता है। भारत के अलांवां हिरण की ये प्रजाति पाकिस्तान और नेपाल में भी पाया जाता है। इन क्षेत्रों मेें जहां संरक्षण की ब्यवस्था है वहां ये अपनी आबादी बेहतर बनाये हुए हैं। कहीं -कही क्षेत्रीय शिकायत दर्ज की गई है कि ये किसान की फसलों को हानि पहुंचाते हैं। काले हिरण के भविष्य को लेकर आप चिंता ब्यक्त कर सकते हैं कि चरागाह सिकुड़ते चले जा रहे हैं, औद्योगिक प्रसार इनकी हस्ती मिटानें के करीब पहुंच चुके हैं। कुल मिलाकर इनका जीवन संकट में है। इनके वास स्थान ही इनसे छिनते चले जा रहे हैं। लेकिन फिर भी इनके मामले में देश के कुछ हिस्सों में स्थिति संतोषजनक है।
काला हिरण की खसियत !
आन्ध्र प्रदेश का राज्यपक्षी है काला हिरण। काले हिरण की मुख्य बात ये है कि वो वातावरण के अनुकूल खुद को ढाल लिये हैं, और हालात बदलने के मुताबिक जीवननिर्वहन कर रहे हैं। यहां महत्वपूर्ण है कि बढ़ती इंसानी आबादी घटते चरागाह व जंगल पालतू पशुओ के बढते फार्म हाउस कल्चर, टाउनशिप , आधुनिक आर्थिक विकास इस बेजुबान पर खुला अत्याचार कर रहे हैं। काला हिरण ज्यादातर पर रेगिस्तानीं इलाकों में पाया जाता है। पहले इसका अधिक मात्रा में शिकार हुआ करता था जिससे इसे बचाने के लिए कड़े विधिक प्राविधानों का सहारा लेना पड़ा।
अतीत में काला हिरण की महत्ता !

CheetahHuntभारतीय संस्कृति में अतीतकाल से ही काले हिरण का प्रमुख स्थान रहा है। सम्भवतः सिंधु घाटी सभ्यता में ये भोजन का स्रोत रहा है और धोलावीरा और मेहगढ में भी इनकी हड्डियों के अवशेष पाये गये हैं। कलाप्रेमी मुगलवंश के शासनकाल में चित्रकारी 16वीं तथा 19वीं सदी में काला चितेरा की पत्थर पर उकेरी गई मुर्तियां इनके होनें का प्रमाण देतीं हैं। पेंण्टिंग में भी इनकी झलक छोटे-छोटे चित्रों के माध्यम से इस काल के अवशेषों में मिली हैं। भारत और नेपाल में ब्लैक बक को मारा या हानि नहीं पहुंचाया जाता।राजस्थान के बिश्नोई तथा कई अन्य आदिवासी समुदाय इन्हें गौ माता के समान पूजतें हैं। संस्कृत में काला हिरण यानी ‘ब्लैक बक‘ को ‘कृष्ण मृग‘ कहा गया है। सनातन धर्म के प्राचीन ग्रंथों में ब्लैक बक भगवान कृष्ण का रथ खींचते हुए प्रतीकात्मक वर्णन है। सम्भवतः इनके उछल कूद व यरपट रेस अगाने के कारण इन काले हिरण को वायु, सोम और चंद्र देवताओं का वाहन भी बताया गया है। उदयपुर में चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट राहुल भटनागर के मुताबिक काला हिरण चक्रानुक्रम में नम्बर 1 पर आने वाला जानवर है । इसके शिकार पर पूरी तरह सरकार ने पाबंदी कर रखी है।
शारीरिक बनावट !

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ब्लैक बक नर का वजन लगभग 34.45 किलोग्राम होता है। कंधे पर उसकी ऊंचाई 74.88 सेंटीमीटर होती है जबकि मादा का वजन 31.39 किलोग्राम होता और ऊंचाई नर से थोड़ी कम होती है। मादा ब्लैक बक भी नर की तरह सफेद रंग लिए होती है, दोनों की आंखों के चारों ओर मुंह तथा पेट के हिस्से और पैरों के भीतरी हिस्से पर सफेद रंग होता है। इनके बीच पहचान का सबसे बड़ा अंतर सींग का होता है। रन के सींग लम्बे होते हैं वहीं मादा की सींग छोटी होती है।
काला हिरण में रंग बदलनें की क्षमता होती है !
मना जाता है कि नर ब्लैक बक रंग बदलते है। मानसून के अंत तक नर हिरणों का रंग ज्यादा काला दिखता है। लेकिन सर्दियों में ये रंग हल्का पड़ने लगता है और अप्रैल की शुरुआत तक एक बार फिर इनका रंग भूरा हो जाता है।
जीवन यापन !
सामान्य क्षेत्रों में जहां चरने लायक स्थान हैं वहां काला हिरण घास व झाड़ियों की पत्तियां चरते व चबातें हैं, लेकिन थोड़ी बहुत हरियाली वाले रेगिस्तानी क्षेत्रों में भी इनका जीवन झाड़ियों से पत्तियां खा कर चलता है। वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट की मानें तोे ब्रिटिश काल में इन्हें मारना प्रतिबंधित था।
आंकड़ों  में काला हिरन !

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ये घने जंगलों का जानवर नहीं है। घास की खोज में ये मैदानी इलाकों में भी निकल जाते हैं। आज सलमान खान केस के बाद इस बात पर भी बहस होनी चाहिए कि ये असुरक्षित होते शाकाहारी जानवर इंसानों की बढ़ती आबादी व अर्थब्यवस्था के शिकार हैं। ये रुतबेदार जमीनचोर -भूमाफिया इन्हें सभी कानूनों के प्रतिबंध के बावजूद ऐसा वातावरण बना रहे हैं कि ये बेजुबान भूख से मर जाय।
यहां सरकार की सहमति- असहमति दानों के बीच सजा इस बेजुबान को बहुत बुरी मिल रही है।इनके बचाव में आवाज उठानेवाले वो समुदाय भी आगे नहीं आ रहे जो सलमान केस में शिकायतकर्ता थे। सम्भव है काला हिरण का भरण-पोषण क्षेत्र को कानूनी रास्ते से इस्तेमाल कर उन्हें भी गुमराह किया जा रहा हो। अनुमानतः 2 सौ वर्ष पुर्व काला हिरण 40 लाख थे। 1947 में 80 हजार बचे रहे। 1970 के आस-पास इनकी आबादी घटकर लगभग 22.24 हजार हो गई । शिकार पर कानूनी प्रतिबंध के बाद वर्ष 2000 आते-आते इनकी संख्या 50 हजार के लगभग पहुंच गई। भारत में काले हिरण मुख्यतः राजस्थान-पंजाब तथा मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात में पाए जाते हैं। भारत के अलांवां नेपाल में काला हिरण मात्र 200, अर्जेंटीना में 8600 , अमरीका में 35 हजार मात्र शेष बचे हैं। भारत में आबादी वाले स्थानों पर काला हिरन जीवन जीने का हुनर सीख लिये हैं।कुछ इलाकों में ये फसलों को नुकसान भी पहुंचाते हैं। किसानों को इनसे सहानुभूति है इसलिये ये नीलगायों के साथ की जानेवाली र्बबरता से बच जातें हैं।

                                                                                                                                                 Vaidambh Media Report

 

 

source: bbc

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