श्री मोदी, आपके भाषण पर हमें आपत्ति है !

धनंजय ब्रिज

प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदर भाई मोदी के सम्बोधन में जादू है। एक ऊर्जावान देश के ऊर्जावान प्रधानमंत्री वर्तमान में विश्वभर में ऊर्जा का दोहन करने वाले संयुक्त राष्ट्र अमरीका में हैं। भारत में मीडिया पूरे दमखम के साथ उन्हे विश्व का हीरो बनाने पर आमादा है। सम्मोहन करने वाले व्यक्ति को विद्वान फरेबी माना जाता है। दुनिया में भारतीयों का दिल जीतने का अथक प्रयास कर रहे श्री मोदी भलीभांति जानते हैं कि देश के बाहर वाले प्रवासी भारतीय ही उनके सच्चे हितैषी है, क्योंकि भारतवासी तो मतदाता है जिससे पांच साल बाद मिलना है। जमीनी बात करने वाले प्रधानमंत्री मोदी अमरीका में अपने सम्बोधन के दौरान उन विज्ञापनों की प्रामणिकता दे गये जो उन्हें फेकू बुलाते हैं। एक भारतीय नागरिक होने के नाते आपके भाषण के कुछ अंश पर मुझे कड़ी आपत्ति है……

1. इतिहास के पन्ने में देखे चाहे धर्मग्रंथ खागालें या फिर कार्बनडेटिंग या पुरातत्वविदों से जानकारी करें। भारत की विद्वता का लोहा पूरा विश्व मानता रहा है। मोदी साहब मुझे अफसोस है कि विश्व मंच पर जितना बदनाम (सांप चूहो का देश कह कर ) आप कर रहे हैं ऐसा कभी किसी प्रधानमंत्री ने नहीं किया। उस कथित पत्रकार को जिसने आपसे ऐसा सवाल किया उसे भारत के वाणभट्ट, बौद्धायन जैसे गणितज्ञों का परिचय बताते हुए उसके प्रश्न पर कड़ी आपत्ति दर्ज करानी चाहिए थी। ज्ञात हो कि आज जिस आधुनिकता की बात करते हैं उसमें कम्प्यूटर हमारे दिये शून्य के अलावा कोई भाषा नहीं समझता।
2. तीस लाख भारतवंशी अमरीकियों से गंगा सफाई अभियान पर आप क्या पाना चाहते हैं? जितने भी फैक्ट्रियों का कचरा व गंदगी फैलाने का काम देशभर में आप देख रहे हैं वह इन्ही तरह के पूंजीपतियों को स्वच्छ बनाने के चलते होता है।
3. विश्व में सत्य, अहिंसा के वाहक देश के राष्ट्रपिता का नाम जब कोई भारतवासी विश्व के किसी भी देश में लेता है तो उसे सम्मान की नजर से देखा जाता है। ऐसे बापू का सम्मानजनक नाम लेने में आपको ना केवल तकलीफ हुयी बल्कि आपने उच्चारण भी मोहन लाल गांधी, मोहन दास गांधी के रुप में किया। जो आपके छदम् श्रद्धा को व्यक्त करता है।
4. सम्बोधन के दौरान प्रधानमंत्री के बजाय कोई व्यापारी दिखायी दे रहा था, जो बड़ी होशियारी से दुनिया को बता रहा था कि हमारे देश में 85 करोड़ युवा मजदूर दुनिया के मशीन में पिसने के लिए तैयार हैं। ये उपनिवेशवाद कब बन्द होगा? गौर कीजिए दो विकसित राज्य महाराष्ट्र व गुजरात के सामने बिहार व उत्तर प्रदेश का मजदूर भूगोल किसी उपनिवेशवाद से कम है क्या?
5. खुद के देश की बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं मुंह चिढ़ा रही हैं। अकेले पूर्वी उत्तर प्रदेश के 40 हजार मासूमों को मस्तिष्क ज्वर की बीमारी ने समूचा निगल लिया। स्वास्थ्य के जर्जर व्यवस्था के बीच विश्व मंच पर आपने नर्स एक्सपोर्ट करने की बात कहकर न केवल नारी सम्मान को ठेस पहुंचाया, देश के बीमार हालात के साथ न्याय नहीं किया।
6. हर मामले में सीधा संवाद करने के आदी कारपोरेट संत श्री मोदी अमरीका जैसे देश में जब आपको मंच मिला तो उस समय गुजरात दंगे पर विश्व को सफाई देने का एक शानदार मौका था जिस पर आपने कुछ भी नहीं कहा। उल्टे देश के पिछड़ेपन को वो राग अलापा कि भारतवासी के विकास के पहिये में गतिरोध पैदा होता दिखा।
अमरीकी कूटनीतिक व्यवस्था में हर पल सर्तक रहने की आवश्यकता होती है। यहां इतिहास गवाह है कि अमरीकी आस्कर में मदर इण्डिया को नहीं बल्कि स्लम डाॅग मिलेनियर को ही वोट करते हैं।

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