सब वोट बैंक है ?

देश का  हर  कस्बा कैराना है साहब ;  भूख, बेकारी है पलायनवाद की जड़ !

Shamli:  भारत को विविधता में एकता समेट कर विश्व का महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक देश होने का गौरव प्राप्त है। Kairana.10भाषा , बोली, पहनावा, धर्म -जाति विचार सब बॅटे होने के बावजूद; हम भारतीय, एक देश में हैं। शायद यही एकता  ही सत्ता की गलियों में आते- जाते लोगों को अखंरती है । खुराफाती लोगों के साथ मिलकर ये लोग कहीं सामप्रदायिकता तो कहीं क्षे़त्रवाद व जातिवाद की इण्डस्ट्ी लगाकर उसमें भारी निवेश कराते हैं ताकि सिरफिरे, भावंुक, भटके लोगों को अफवाह मजदूर , हिंसा प्रभारी जैसे पदों पर बैठाकर  अपने लिये सत्ता का मार्ग सुगम कर  सकें ।

आज  उत्तर प्रदेश के शामली जिले का छोटा सा कस्बा कैराना; राजनीतिक दखल से भैचक्क है।kairana पिछले कुछ दिनों से यहाॅ के निवासियों  की नींद इस बात से उड़ी है कि प्रदेश भर के नेता यहाॅ जत्थे में पहुॅचकर लोगों से धर्म- जाति व पलायन पर सवाल दाग रहे हैं, सम्मेलन कर रहे हैं, जो यहाॅ का आम आदमी उसे समझने की जरुरत भी महसूस नहीं कर रहा। भारतीय जनता पार्टी ने तो इसे आगामी विधानसभा में चुनावी मुद्दा बनाने की ठान ली है लेकिन  इधर छानबीन के बाद लव जेहाद की तरह यह मुद्दा बेदम जाान शिर्ष नेताओं ने दिलचस्पी कम कर दी है। धीरे- धीरे यह मामला बेसिर पैर का हो चला है। कैराना कहाॅ नही है?  पश्चिमी उत्तर प्रदेश का ये अलशाया कस्बा कैराना , राजनीति के हर उन थोथे चनांे से सवाल कर रहा जो चुनाव में विकास की बात करते हैं ; चुनाव के बाद हाल जानने भी नही आते।

कहाॅ नही है कैराना  ?

kairan historyकैराना की मूल समस्या वही है जो पूरे देश के गावों कस्बों की है। चंद पढ़े लिखे लोग भी आज शहरों की ओर आकर्षित हो गांव छोड़ कर स्थायी रुप से शहर में बस रहें हैं। कमजोर पड़ती कृषि उजड़े पड़े लघु उद्योग गाॅव छोड़ने को मजबूर कर रहे हैं। जो छोटे मोटे ब्यवसायी संघर्ष के दिनों में अपना काम काज बचाये हुए हैं उनसे लोकल माफिया गुण्डा टैक्स वसूल रहे हैं । कुल मिलाकर कहें कि कानून ब्यवस्था के मामले को भी साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिश जारी है तो गलत नही होगा । प्रश्न उठता है ऐसा क्यों है? शायद इसके लिये कही ना कही हम सब ही जिम्मेदार हैं जो मुद्दा और मूल को समझना नही चाहते।

कैराना पर बवाल काटने वाले हुकुम सिंह

hukum-singh-kairana हुकुम सिंह कैराना मामले में हंगामा खड़ा करने वाले शख्स; जिन्होने भारत के गृहमंत्री को पत्र लिखकर अवगत कराया कि प्रदेश में एक कश्मीर का उदय हो रहा है प्रदेश सरकार कुछ नहीं कर रही। स्थानीय संासद हुकुम सिंह पिछले 3 दशक से यहाॅ का प्रतिनिधित्व कर रहे है। फौज से रिटायर फिर वकालत करते हुए 1974 में राजनीति के पायदान पर कदम रख कर कांग्रेस के टिकट पर दो बार विधायक बने और फिर आगे का सफर भाजपा का दामन थाम कर पुरा किया। ये  मार्च 2013 में भाजपा विधायक दल के नेता रहते हुए विधान सभा में हिंदुओं के पलायन की बात उठाा चुके है। उस समय आजम खॅा ने उन्हे सपा में शामिल होने की बात कही थी। इसी क्षेत्र से विजयी होकर हुकुम सिंह सात बार विधान सभा जा चुके हैं। 2009 में लोकसभा हार गये और मोदी लहर में 2014 में बम्पर वोटों से जीत भी दर्ज की।इन्हे राजनीति गलियारे में सुलझाा व गम्भीर ब्यक्ति माना जाता है।  हुकुम सिंह 35 वर्षोें से जिम्मेदार नेता के रुप में  अपने क्षेत्र को कश्मीर बनते देखा कैसे और क्यों !

 

कैराना का परिचय !

Ustad karim Khan

USTAD ABDUL KAREEM KHAN

कैराना में किराना घराना मुगलकाल में काफी अहम था। उसी का अपभ्रंस है कैराना। ये लोग शास्त्रीय संगीत में निपुण व सम्मान प्रप्त लोग थे। दूर- दूर से इस घरानें में संगीत सीखने लोग आया करते थे। उत्तर भारत में शास्त्रीय संगीत की महान धरोहर ,  मुगलकाल के बाद इसका रुतबा कम हुआ और ये घराना अलग- अलग राजा महराजाओं के दरबार में जाने के कारण विलग हो गये।किराना घरानें के संस्थापक अब्दुल करीम खॅा को माना जाता है।यह कस्बा उन्ही के दिब्यपुंज से अपने में शस्त्रीय संगीत की विरासत समेटे विकास के इंतजार में उबासी पर उबासी ले रहा है। यह वीणा, सारंगी, सितार, तबला बादकों का गढ़ हुआ करता था। 20वीं सदी के सबसे बड़े संगीतकार ‘पंडित  भीमसेन जोशी’ इसी मिट्टी के लाल रहे।

कैराना में जबतक संगीत की इज्जत रही किराना घराना अपने वजूद समेंटेें वही की मिट्टी में मिलकर दूर तक महकता रहा लेकिन जब यहाॅ विकास की ढोलपीटने वाले हल्ला मचाना शुरु किये तो यह विरासत छिन्न भिन्न हो गयी।BHIMSEN JOSHI किराना पलायन करके दूर दूर तक अपनी विलक्षण आवाज का जादू विखेर कर संगीत की दुनियां में अमरत्व प्राप्त कर चुका है।डा0 प्रभा आत्रे, पंडित वेकटेश कुमार, जयतिर्थ  मेंवुड़ी , उस्ताद मज्कूर अली खाॅन ये यदि पलायन नहीं करते तो दुनियाॅ इन्हे नहीं जान पाती आज संगीत इनसे जिंदा है। ये बात हुकूम सिंह ,अमित शाह, राहुल गाॅधी, अखिलेश यादव, मायावती, अरविंद केजरीवाल क्या समझ पा रहे हैं या सिर्फ राजनीतिक स्वार्थ ही एक मात्र धर्म रह गया है ! विपक्ष की राजनीतिक पार्टियां हो या सत्ता पक्ष,  कैराना का सवाल  तो आज सबसे है। विकास की गंगा बहाने वालों बताओ कैराना के लोग पलायन क्यों कर रहे हैं? भजपा को हिंदू दिखा, सपा को मुसलमान, कांग्रेस को गरीबी दिखती है तो बसपा को दलित ! क्या ये पार्टियां सचमुच विकास चाहती हैं ? यदि चाहती तो हालात से लड़ता इनसान इन्हे जरुर दिखता  पर अफसोस ! कभी मुजफफर नगर ..कभी दादरी …कभी कैराना  तो कभी मथुरा का जवाहरबाग..  सब बोटबैंक है।

Vaidambh Media

 

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