सरकार ; सोना पाने के लिये विश्वास बढ़ायें- पसीना बहायें !

चुनाव के बाद चुनी गई  सरकारें , सब काम ‘रेडिमेड’  करने लगतीं हैं  !

सोना एक ऐसा धातु है; जिसकी वैश्विक बाजार में अपनी हैशियत है। देश के विकास के लिये सरकारें सदैव प्रयास में रही हैं कि गहनों में पिरोकर घरों की आलमारियों में सजा सोना अब बाहर निकले व देश-हित में उसका उपयोग हो !  narendra-modi-gold-pti-L देश की जनता सदियों से सोने के जवाहरात पहनते व उसे जानपर खेलकर बचाते आई है। सरकार का उसे आसानी से प्राप्त कर पाना सम्भव है ! कदापि नहीं। यहाॅ भगवान के मंदिर, मस्जिद, गिरिजाघर  में गुप्त दान में सोना चढ़ा देंगे पर सरकार की निगरानी में अपना सोना नहीं देंगे। इसके लिये जनता नहीं सरकार दोषी है जो जनता के भीतर विश्वास बना पाने में नाकाम रही है। एक वह दौर था जब इसी देश की माॅ बहनों ने सुभाष बाबू पर सर्वश्व न्यौछावर कर दिया । यह हुआ उनके उपर भरोसे के कारण । सरकारें चुनाव के बाद सब काम ‘रेडिमेड’  करने लगतीं हैं लिहाजा जनता खुद को ठगा मान विकल्प तलाशने में जुट जाती है। jawahratमंदिरों ,मस्जिदों, गुरुद्वारों , गिरिजाघरों में जमा होते साने पर आज तक किसी सरकार ने कहीं भी कड़े नियम नहीं बनाये; यह साबित करता है कि सत्ता और धर्म का गठजोड़ ही भारतीय राजनीति की धुरी बन चुका है। भारत ही क्यों वैश्विक स्तर पर यह दृश्य देखा जा सकता है। हाॅ कहीं-कहीं तो धार्मिक मठ ही सरकार को लोन करते हैं। भारत में धर्माधिकारियों से उनके मठ व जमा सोने की बात पर अपील तो की जाती है पर ना ही उनकी जमीन अधिग्रहित की जा सकती है ना ही उनके सोने पर ही कोई कानून बनाया जा सकता है। हाॅ इसका एक कारण शायद ये भी हो कि धर्म-मठवाले राजनीतिक बृक्षों की जड़ों मे गहरे समाये हुए हैं। सरकार अगर धर्म-मठ को मना लेती है तो जनता का विश्वास सोना पाने के लिये जीतना कोई बड़ी बात नहीं होगी!

1.2 अरब लोगों की दीवानगी से निपट पाना आसान नहीं !

सन 1999 में आई स्वर्ण जमा योजना के जरिये 16 साल में 15 टन सोना जुटाया गया और वर्ष 2015 की स्वर्ण मुद्रीकरण योजना के तहत शुरुआत के दो सप्ताह बाद 400 ग्राम सोना ही एकत्रित हुआ है।Modis-goldcoin-scheme नई योजना की अभी शुरुआत ही हुई है लेकिन सरकार की ओर से आम घरों और संस्थानों में एकत्रित 20,000 टन सोने का मुद्रीकरण करने के लिए लाई गई इस बहुचर्चित योजना की शुरुआत यकीनन उम्मीद की तुलना में काफी कमजोर रही है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक देश के आम घरों और मंदिरों में करीब 52 लाख करोड़ रुपये मूल्य का 20,000 टन सोना यूंही बेकार पड़ा हुआ है। इतना ही नहीं हमारे देश ने वर्ष 2014-15 में 915.54 टन सोना आयात किया। उससे पिछले वर्ष यह मात्रा 661.71 टन थी। पिछले पांच साल की बात करें तो सोने की औसत मांग करीब 895 टन सालाना थी। यह सोने की वैश्विक मांग का करीब एक चौथाई है। एक सुनियोजित योजना की मदद से इस मांग से निपटा जा सकता है।

योजना की शुरुआत में हुंई अनदेखी  ; देश में मात्र 35-40 संग्रह केंद्र ही हैं !

कागजों पर देखा जाए तो यह योजना बेहतर प्रतीत होती है। यह सन 1999 की जमा योजना से काफी बेहतर है।modi sward निजी व्यक्तियों के लिए जमा का स्तर पिछली योजना के 500 ग्राम से कम करके 30 ग्राम कर दिया गया है। इसके अलावा इससे होने वाली आय को पूंजीगत लाभ कर, सपंत्ति कर और आय कर से छूट प्रदान की गई है। लेकिन जल्दी ही इसकी वे कमियां सामने आने लगीं जिनकी सरकार ने योजना की शुरुआत करते समय अनदेखी की थी। उदाहरण के लिए योजना में कहा गया था कि सोने की शुद्घता का आकलन मान्यताप्राप्त केंद्र से करना होगा। लेकिन किसी ने भी इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि देश में ऐसे केंद्रों की संख्या बहुत ज्यादा नहीं है। एक अनुमान के मुताबिक पूरे देश में ऐसे 35-40 संग्रह केंद्र ही हैं।

अभी भी  हैं तमाम संदेह !

बैंकों की बात करें तो दूरदराज इलाकों से सोना एकत्रित करना और उसे देश के चुनिंदा इलाकों में आभूषण विक्रेताओं तक पहुंचाना लगभग अव्यावहारिक काम है।Gold-EP2 अच्छी बात है कि सरकार अब जाग गई है और उसने यह तय किया है कि सोने का परीक्षण करने वाले केंद्रों का नेटवर्क सघन किया जाएगा। दिसंबर महीने तक रिफाइनरी की संख्या 4 से बढ़ाकर 20 करने और परीक्षण केंद्रों की संख्या 29 से बढ़ाकर 55 करने का इरादा जताया गया है। देश में भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के लाइसेंस प्राप्त ज्वैलरों की संख्या 13,000 है। उनमें से प्रत्येक से कहा जाएगा कि वे योजना के लिए परीक्षण सुविधा मुहैया कराएं। सरकार ने बीआईएस से कहा है कि वह संग्रह एजेंट के रूप में ज्वैलरों के पंजीयन की प्रक्रिया को तेज करे और 15 दिन के भीतर लाइसेंस जारी करे। एक साल के ट्रैक रिकॉर्ड वाले स्वर्ण रिफाइनर और हॉलमार्क केंद्रों को भी इजाजत दी जाएगी। इन सभी बदलावों का असर अभी सामने आना है। इस बात को लेकर अभी भी तमाम संदेह हैं कि इस तरह के बदलाव इस योजना की तकदीर बदलने में कामयाब होंगे अथवा नहीं।

गतिरोध पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं !

gold-10

इस योजना के सबसे बड़ा गतिरोध पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है ‘लोगों की मानसिकता’ ! कुछ ही भारतीय ऐसे होंगे जो अपने गहने को पिघलता हुआ देखना पसंद करें। वहीं किसी भी सरकार के लिए सोने को लेकर 1.2 अरब लोगों की दीवानगी से निपट पाना आसान नहीं होगा वह भी सालाना महज 2.5 प्रतिशत के प्रतिफल पर। उसके बाद कराधान का डर अलग है। लोगों को यह चिंता हो सकती है कि अगर वे अधिक मात्रा में सोना बैंकों को सौंपेंगे तो आयकर विभाग उस सोने का स्रोत जानने का प्रयास कर सकता है।

          D.j.s.

Vaidambh Media

Previous Post
Next Post

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

hogan outlet online scarpe hogan outlet nike tn pas cher tn pas cher nike tn 2017 nike tn pas cher air max pas cher air max pas cher air max pas cher air max pas cher air max pas cher scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet scarpe hogan outlet chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher chaussures louboutin pas cher