सेवाभाव में आगे रहेगा सिविल डिफेंसः अमिताभ ठाकुर

भारतीय पुलिस सेवा में चयन के बाद जनता से सहृदयी रहने वाले अधिकारियों का देश में टोटा ही देखने को मिलता रहा है। इन्ही में से कुछ ने इस छवि को तोड़कर स्वयं की जिम्मेदारी व कर्तब्यों का निर्वहन पूरी क्षमता के साथ किया। जनता से जुड़कर जनता के जटिल मामलों का संज्ञान लेकर सरकार से न्याय की आवाज बुलंद करने में बेखौफ होकर जनता का साथ दिया । इन्ही लोगों में1992 बैच के आईपीएस अमिताभ ठाकुुर भी शमिल हैं। 22वर्ष सरकार को सेवा दे चुके युवा जोश के धनी श्री ठाकुर वर्तमान में पुलिस महानीरिक्षक/संयुक्त निदेशक नागरिक सुरक्षा, उत्तर प्रदेश के पद पर कार्यरत हैं। प्रस्तुत है उनसे इस विभाग से सम्बंधित कार्ययोजना पर वैदम्भ संवाददाता वी0 वैभव की विशेष बातचीत-
अपने बारे में एक सक्षिप्त परिचय!
मेरा नाम अमिताभ ठाकुर है। मैने आईआईटी कानपुर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। 1992 में भारतीय पुलिस सेवा मेें चयनित हुआ। लगभग दस जनपदों में पुलिस अधिक्षक के पद पर कार्य करते हुए सीबीसीआईडी विजलेंस व इंण्टेलीजेंस व पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में विभिन्न पदों पर तैनात रहा हूॅ। वर्तमान में संयुक्त निदेशक नागरिक सुरक्षा कोर का कार्यभार देख रहा हूं।
गोरखपुर में नागरिक सुरक्षा के साथ आपकी बैठक का प्रायोजन!
नागरिक सुरक्षा कोर के जिले में तैनात सभी अधिकारीगण तथा कार्यकर्ताओं से बैठक कर उनके समस्या व निदान के लिए फीडबैक लेना प्रथम उद्देश्य था। इनकी समस्याओं को जानकार निराकरण हेतु शासन को पहुंचाना भी प्राथमिकता में शामिल हैं। जिलों मंे एसपी सिटी तथा जिला वार्डन तथा एडीएम प्रशासन के बीच समन्वय बनाकर काम किया जाने की सहमति व समझ भी उद्देश्य में शामिल रहा।
बैठक से क्या प्राप्त हुआ?
गोरखपुर जनपद में तीन डिवीजन है सभी के पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित थे सभी ने अपनी समस्याएं हमंे खुलकर बतायी। साथ ही निवारण के लिए आईजी सिविल डिफेंस की सहमति मिलने पर लोगों में काफी उत्साह देखने को मिला। नये परिवर्तन की जानकारी प्राप्त कर नागरिक सुरक्षा कोर के लोगों में ऊर्जा का संचार हुआ है, वे अपने कर्तव्यों के निर्वहन के लिए प्रतिबद्ध खड़े हैं।

क्या परिवर्तन हुए है?
पहले कोई भी सिविल डिफेंस में भर्ती हो जाता था अब भर्ती होने वाले को एक सप्ताह का ट्रेनिंग लेना अनिवार्य कर दिया गया है। पहले कुछ चुन्निदा लोगांे को लखनऊ बक्शी का तालाब प्रशिक्षण केंद्र पर जाना पड़ता था, अब कैडेटों को क्षेत्र में जाकर दी जायेगी। 1968 में सिविल डिफेंस के लिए तमाम नियम व शर्ते बनी थी जो आज तक परम्परागत रही। उसमें परिवर्तन करते हुए सरकार ने एक प्रस्ताव पास किया है मानदेय 31 रुपये प्रतिदिन से बढ़ाकर 350 रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा हेलमेट व बाॅडी प्रोटेक्टर भी दिया जाना है। शिकायत रही है कि भूमफिया, अपराधिक व राजनीति से जुड कर सिविल डिफेंस के लोग अनैतिक कार्य करने में संलिप्त थे उनके विरुद्ध एलआईयू से रिपोर्ट मांगी गयी है, इन लोगों को कोर से बाहर करने की व्यवस्था की जा रही है। एक माह तक अगर कोई जाच एलआईयू लटकाएं रखती है तो उसे कार्यकर्ता के पक्ष में मान लिया जायेगा। यहां दुर्गाबाड़ी में सिविल डिफंेस चैराहा बनाने की सहमति प्रशासनिक अधिकारियो से मिली है। इससे कोर से जुड़े लोगो का मान-सम्मान बढ़ेगा।
अब सिविल डिफेंस के क्या कार्य रहे हैं?
1968 में गठित सिविल डिफेंस केवल युद्ध के समय ही सक्रिय रहती आयी है। वर्ष 2009 में सिविल डिफेंस एक्ट में एक संशोधन किया गया जिससे आपदा प्रबंधन का कार्य बढ़ा दिया। इस प्रकार अब सामुदायिक पुलिस तथा आपदा प्रबंधन का कार्य सिविल डिफेंस के लोग देखते हैं हालांकि यह उन्हे किसी एक्ट के तहत नहीं दिया गया। पारम्परिक तरीके से जिला मजिस्ट्रेट के निर्देशन में इसका कार्य संचालित होता रहा है।
खाकी वर्दी पुलिस व सिविल डिफेंस में क्या फर्क है?
सिविल पुलिस लाॅ-एण्ड-आर्डर बरकरार रखना व क्राइम कंट्रोल है। सिविल डिफेंस का काम सरकारी तंत्र से लोगों को जोड़ना है। दोनो एक जगह भी कभी-कभी दिखाई देते हैं। मूलरुप से सिविल डिफेंस जनता का प्रतिनिधित्व करता है। सामुदायिक पुलिसिंग में दोनो की सहभागिता होती है।
सिविल डिफेंस के प्रयोग कितने सफल रहेंगे?
कोई भी प्रयोग व परिवर्तन तभी सफल होता है जब उसमें निरन्तरता हो। सफलता इस बात पर निर्भर रहेगी कि योजनाओं को लेकर जिम्मेदार कितने सजग हैं।
किसी अधिकारी विशेष के सजग होने से सिविल डिफेंस के परिवर्तन सफल होंगे!
हमने प्रयास किया है कि हर व्यक्ति का उत्तरदायित्व नियत किया जाए। सही है कि हमारे अकेले सोचने या करने से बहुत कुछ नहीं हो सकता। फीडबैक लिया जा रहा है, पैरामीटर दिया गया है, कमियों को दूर करने का प्रयास जारी है।

सिविल डिफेंस में प्रशिक्षण कोरम या ट्रेनिंग!
सिविल डिफेंस का काम ऐसा है कि जनता से जुड़े सभी विभागों की जानकारी होनी चाहिए। जनता को प्राथमिकरुप से मदद पहुचा सके, यह जानकारी होना प्रत्येक कार्यकर्ता को आवश्यक है, हम फस्र्ट ऐड करते हैं।

इंसेफेलाइटिस पर भी सिविल डिफेंस के लोग काम प्रशासन के साथ मिलकर जागरूकता में सहभागी बनने को तैयार है इसके लिए सभी संबंधित विभागों से एक गोष्ठी आयोजित कर राय-परामर्श किया गया तथा उत्तरदायित्व बांटने की कोशिश की गयी। आशा है कि गोरखपुर में सिविल डिफेंस एक नयी पहचान व परिवर्तित रुप में दिखायी देगा।
धन्यवाद!

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