हमें क्यूं लगता है कि हम स्वप्नदेश के वासी हैं !

 NewDelhi:  एक समय था जब हम बच्चे  थे और तब परियों की कहानियां एक सुन्दर सपना सा dream in angelथा। अब हम बड़े हो गए हैं और एहसास हुआ की संविधान और गणताान्त्रिक प्रणाली भी एक सपना मात्र ही है, कुछ परियों की कहानी की तरह भीना-भीना सा एहसास होता है, जब कोई कहता है की भारत एक गणतान्त्रिक देश है!

      खास लोगो के गणतंत्र  मे स्वतंत्रता दिवस का उल्लास कैसे ?

कल फिर कुछ अजीब सा हुआ, हमको एक बार फिर समझाया गया कि हम एक खास लोगो के लिए बनाये गए गणतंत्र का हिस्सा है जहाँ हक कि बात करने वाले किसी स्वप्न देश के वासी लगते हैं, हक़ की मांग करना तो सरकार का विरोध करना जैसा है और सरकार एक तानाशाह से कम नहीं है जिसको सिर्फ अपने ही बनाये हुए मुद्दे नज़र आते हैं और एक आम इंसान कितनी ही नाक रगड़ ले सरकारी दफ्तरों के दरवाज़ों पर उनका दर्द किसी को नज़र ही नहीं आता! लगता तो कुछ ऐसा ही है जैसे सरकार मुद्दे भी वही सुलझाती है जो उनके द्वारा ही बनाये गए हों या फिर कुछ ऐसे कहें की ये मुद्दे है तो सरकार है और जिस दिन मुद्दे ख़तम तो सरकार भी! इसलिए वो मुद्दों को कभी जड़ से ख़तम ही नहीं करते बस भुनाते रहते हैं।

50 लोगों ने हिंदुत्व सरकार के गाल पे क्यों जड़ा करारा तमाचा !Damini_s_father

जंतर मंतर पर पिछले 2 सालों में चौथी बार NDMC की ड्राइव हुई, पहले के कारण फिर कभी पूछियेगा परन्तु इस बार दलितों के एक समुदाय ने मोदी यानि मीटर की हिंदुत्व सरकार के गाल पे करारा तमाचा लगा दिया जब उनके 50 लोगों ने मुस्लिम धर्म अपना लिया वो भी दिल्ली के दिल और संसद से मात्र 1 या 2 किलो m  दुरी पर। 14 अगस्त यानि कल जंतर मंतर से सभी प्रोटेस्ट का सफाया कर दिया गया सिर्फ “ONE RANK ONE PENSION” प्रोटेस्ट को छोड़कर! ऐसा क्या था उस प्रोटेस्ट में जिसके लिए केजरीवाल जी तक ने मीडिया में आके अपनी सहानभूति जाता दी जबकि उनकी पिछली सरकार में मंत्री रह चुकी राखी बिडला 29 दिसम्बर 2013 को जंतर मंतर में आकर हमारे मंच से हमारे प्रोटेस्ट और दामिनी लॉ को सहयोग देने की बात कही थी!

आखिर क्यूँ ..?

rapedआखिर क्यूँ केजरीवाल जी ने पिछले 965 दिनों से हो रहे “बलात्कार मुक्त भारत” के तथा अन्य प्रोटेस्ट के लिए जरा भी सहानभूति नहीं दिखाई?

  • आखिर क्यूँ अभी तक भारत की राजधानी में हो रहे प्रोटेस्ट (24 दिसम्बर 2012) को पूछने के लिए एक सरकारी परिंदा भी पर मार कर नहीं गया?
  • आखिर क्यूँ एक गैर राजनितिक समुह की मांगो को मान्यता नहीं दी जा रही जबकि उनकी कोई भी मांग निजी नहीं है, सभी देश के हित में है?

   

 

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बलात्कार मुक्त भारत

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