हैवानियत: दोस्त का कलेजा पका उड़ायी दावत

गोरखपुर। हालीवुड की फिल्मों में इंसान को आदमखोर भेडिया बनने की घटना का कारण शैतानी शक्तियों व जानवर के जीन का संक्रमण बताया गया है। कभी ऐसी घटना कल्पना में भी नही रही, कि इंसान को पकाकर खाया जाए। रांगटर्न जैसी फिल्मों में इस दृश्य की परिकल्पना पहली बार देखने को मिली। यदि यह आपके सामने व सामाजिक जीवन में आम हो जाए तो मानव समाज के अन्दर आने वाले भूचाल की कल्पना कीजिए।
गोरखपुर जनपद के खजनी थाना क्षेत्र के बोगा स्थित ईट-भट्ठे पर काम करने वाले मजदूरों ने आपसी झड़प में एक मजदूर की हत्या कर डाली। बुधवार को हुए इस घटनाक्रम में सबसे अलग बात यह थी कि जिस युवक पप्पू की हत्या हुयी उसका कलेजा चीरकर निकाला गया था। पुलिस ने छानबीन में डाॅग स्कावयड की मदद ली, खोजी कुत्ता मृतक पप्पू के कमरे से निकलकर लाश वाले स्थान तक जाने के बाद ईट-भट्ठे पर गया और वहां खड़े पवन को पकड़ लिया। पुलिस ने अपना अंदाज दिखाते हुए उसे समझाया कि सच नहीं बताओगे तो यह खोजी कुत्ता तुम्हे चबा जायेगा। पवन ने जब मुंह खोला तो पुलिस के हाथ-पांव सूख गये। उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ कि कोई आदमी को मारकर उसका कलेजा चीरकर निकालेगा और हैवानियत की हद पार करते हुए उसे भूनकर खायेगा। पुलिस के मुताबिक चिलुआताल निवासी पप्पू बोगा गांव में ईट भट्ठे पर काम करता था। बुधवार को ईट-भट्ठे से दो सौ मीटर दूर उसकी लाश मिली। छानबीन में पवन ने जो जानकारी दी उसके अनुसार भट्ठे पर काम करने वाले जनक और उसकी पत्नी राधा तथा पवन ने जुए में पैसे हारने के कारण आपस में मारपीट की थी। मारपीट में पप्पू बेहोश हो गया। इसके बाद जनक और उसकी पत्नी राधा के भीतर का नरपिशाच जाग गया और दोनों ने पवन के सहयोग से उसका पेट फाड़कर कलेजा निकाल लिया। हैवानियत यह भी तीनों ने मिलकर आदमी के कलेजे का स्वाद कैसा होता है इसके लिए बकायदा उसे पकाकर खाया। जब कुछ टुकड़ा बच गया तो उसे बगल में झाड़ी के पास फेंक दिया। पुलिस ने पवन के निशानदेही पर उसे भी बरामद कर लिया।
हमारे समाज में नरपिशाच का कहानी समय-समय पर सुनने को मिलती रही है। लगभग पांच वर्ष पूर्व गुलरिहा थाना क्षेत्र के बांसस्थान में चिलुआताल के आसपास एक बच्चे की मौत को लेकर परिवार के लोगों ने उसे दफना दिया था। जब परिजन वहां से चले गये तो दोपहर में एक नरपिशाच गड्ढा खोदकर बच्चे का शव निकाला और उसका भेजा दांत से काटकर खाने लगा। मवेशी चरवाहों ने इस बात की जानकारी मृत बच्चे के परिजनों को दी। जिस पर परिजन नरपिशाच व्यक्ति को भगाकर शव को पुनः दफनाया तब इस मामले को पागल की हरकत करार दिया गया था जबकि उस घटना की व्यापक जांच की आवश्यकता थी।

मनोवैज्ञानिक की राय :

इंसान का इंसानी मांस खाना यानि कैनाबोलिज्म: तन्वंगी मणि

इंसानो में जानवरो जैसा व्यवहार अथवा आदमी को आदमी का मांस खाने की प्रवृत्ति विकसित होना कैनाबोलिज्म कहलाता है।  यह एक मानसिक विकृति है ।मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि इंसानी मांस खाने की घटनाएं सदियों से छिटपुट होती आ रही है। यह प्रवृत्ति दो कारणों से विकसित होती हैं एक भोजन का अभाव दूसरा अंधविश्वास। फिलहाल इसका कोई प्रामाणिक इलाज़ संभव नही है फिर भी कुछ मनोवैज्ञानिक इसके सफल इलाज़ का दावा करते है । फिलहाल रिकार्ड के रुप में दुनियाभार में अभी तक इंसान का कलेजा भूनकर खाना की पांच घटना दर्ज की गयी है। जबकि व्यापक व प्रमाणित घटना के रुप में गोरखपुर के बोगा में कलेजा भूनकर खाना विश्व की छठवी घटना के रुप में दर्ज किया जा सकता है।

 

धनंजय ब्रिज

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