1952 लोकसभा चुनाव : जब औंधेमुंह गिरे दिग्गज

स्वाधीन भारत के प्रथम लोक सभा चुनाव में काग्रेस की धूम रही। गोरखपुर क्षेत्र के अंतर्गत उस समय चार सीटें आती थीं। प्रथम लोकसभा चुनाव में यहा से अपनी विधा के विश्वप्रसिद्ध लोग काग्रेस के खिलाफ मैदान मे उतरे। जनता ने इन दिग्गजों को साफ नकार दिया। यहा सशक्त राष्ट्रवाद हावी था। ऐसे मे काग्रेस का पलड़ा भारी रहा और दिग्गजों को मुंह की खानी पड़ी। पराजित दिग्गजों में प्रदेश की पहली महिला मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी, प्रख्यात शिक्षाविद प्रो0 शिब्बनलाल सक्सेना,अंग्रेजी के प्रसि़द्ध विद्वान व उदर्ू शायर डा0 रघुपति सहाय तथा गोरक्षपीठ के महंथ दिगिवजयनाथ शामिल थे।दो दिग्गज तो अपनी जमानत भी नहीं बचा पाये।
अपनी सरकार चुनने का अधिकार पाने के बाद आजाद भारत का यह पहला जनोत्सव था। 128 दिनों तक चलेे इस उत्सव को जनता ने उल्लास के साथ मनाया। 18 अक्टूबर 1951से 24 फरवरी 1952 तक चले आम चुनाव मे काग्रेस का परचम चारो सीटों पर लहराया। गोरखपुर क्षेत्र की चार सीटों पर मतदाताओं की कुल संख्या 18 लाख 31हजार 1सौ 45 थी। 35प्रतिशत लोगों ने अपने मत का प्रयोग किया। इस तरह चारो सीट पर कुल 8लाख 67हजार 9सौ 72 मत पड़े। गोरखपुर जिला सेण्ट्रल संसदीय सीट संख्या60 से काग्रेस के वरिष्ठ नेता व स्वदेस अखबारेके क्रातिकारी सम्पादक दशरथ प्रसाद द्विवेदी 1लाख8हजार 8सौ98 मत प्राप्त कर विजयी रहे। इसी सीट से लड़ रहीं किसान मजदूर प्रजा पार्टी की प्रत्याशी सुचेता कृपलानी को महज 7हजार 3सैा40 मत ही प्राप्त हुए। कृपलानी अपनी जमानत नहीं बचा पार्इं। द्विवेदी जी को रिकार्ड 75‐29प्रतिशत वोट मिले। कृपलानी आगे चलकर 1961 मे प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं। गोरखपुर जिला दक्षिण लोकसभा सीट61 से काग्रेस के सिंघासन सिंह विजयी रहे। उन्हें 3लाख 42हजार 7सौ96 मे से कुल 57 हजार 4सौ 50 मत ही प्राप्त हो सका,जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंदी रहे हिंदू महासभा के उम्मीदवार महंथ दिगिवजयनाथ को महज 25हजार 6सौ 78 वोट मिले। यही से भाग्य आजमा रहे मशहूर उदर् शायर फिराक गोरखपुरी किसान मजदूर प्रजा पार्टी से मात्र 9 हजार 5सौ 86 वोट प्राप्त कर चौथे स्थान पर रहे। बस्ती सेण्ट्रल जिला 58 तथा गोरखपुर जिला पशिचम के संयुुक्त संसदीय सीट पर काग्रेसी उम्मीदवार क्रमश:रमाशंकर लाल 1लाख 93हजार 7सौ 33मत तथा 1लाख 69 हजार 6सौ10 मत प्राप्त कर सोहन लाल धूसिया विजयी रहे। यहा मतदाताओं की कुल संख्या 7लाख 30 हजार 3सौ 29 थी। इस दौर का सबसे रोचक व एतिहासिक मुकाबला गोरखपुर जिला उत्तरी संसदीय क्षेत्र संख्या59 पर हुआ। यहा मतदाताओं की कुल संख्या 3लाख 69 हजार 3सौ थी। यहा काग्रेस प्रत्यासी हरिशंकर प्रसाद 67हजार 3सौ 41मत पाकर विजयी घोषित किये गये।उनके निकटतम प्रतिद्वंदी किसान मजदूर प्रजापार्टी के प्रो0 शिब्बनलाल सक्सेना महज 32हजार 5सौ 31 मत ही प्राप्त कर सके। जनता की अदालत में हारे प्रो0 सक्सेना ने अपने प्रतिद्वंदी को चुनाव आयोग के समक्ष स्वयं की योग्यता साबित करने की चुनौती दी। उपलब्ध साक्ष्यों व बयानों के आधार पर चुनाव आयोग ने काग्रेस प्रत्याशी हरिशंकर प्रसाद को अयोग्य घोषित कर प्रो0 सक्सेना को विजयी माना।
यह चुनाव कुछ लोगों के धैर्य का इम्तहान भी रहा। दोनो राजनीतिज्ञ जिनकी जमानत नहीं बच पायी उनमें फिराक साहब ने तो हमेशा के लिये चुनाव से तौबा कर लिया; जबकि सुचेता कृपलानी को सकि्रय राजनीति मे रहने के कारण 1961 मे प्रदेश की प्रथम महिला मुख्यमंत्री बनने का गौरव प्राप्त हुआ।

विनीत कुमार

9839968968

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