इनकम टैक्स भरते समय जानने योग्य प्रमुख बातें !

नाबालिग बच्चों के जमा खाते पर मिलने वाला ब्याज, माता-पिता की आय का हिस्सा

parentsअपने बच्चे के सुनहरे भविष्य के लिए आप बैंक में उसके नाम पर एक आवर्ती जमा खाता खोलते हैं और उसमें हर महीने 5,000 रुपये जमा करते हैं। लेकिन उस पर मिलने वाले ब्याज का खुलासा अगर आप आयकर रिटर्न दाखिल करते वक्त नहीं करते हैं तो आप मुश्किल में पड़ सकते हैं। इसे कर चोरी माना जाएगा और आयकर अधिकारी आपको नोटिस भेज सकते हैं। असल में 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के खातों पर मिले ब्याज को उनके माता-पिता की आय में जोड़ दिया जाता है।

वित्त वर्ष में  बचत खाते से 10 हजार का लाभ उठाते हैं तो भरे टैैक्स

bachatऐसी अनेक घटनाएं हैं, जहां लोग अपनी आय अथवा संपत्तियों का खुलासा नहीं करते हैं क्योंकि उन्हें यह अहसास ही नहीं होता कि ये संपत्तियां कर योग्य होती हैं। एक और उदाहरण लीजिए। बैंक में आपका बचत खाता है, जिस पर आपको ब्याज मिलताहै। यदि वित्त वर्ष के दौरान किसी भी व्यक्ति को बचत खाते पर 10,000 रुपये से अधिक ब्याज

incom tमिलता है तो उस पर उसे कर भरना होगा। पीडब्ल्यूसी में पार्टनर कुलदीप कुमार कहते हैं कि तमाम लोग कंपनियों में जमा राशि, सावधि जमा और डाकघर बचत योजनाओं पर मिलने वाले ब्याज का खुलासा आयकर रिटर्न में नहीं करते क्योंकि इस प्रकार के निवेशों पर स्रोत पर ही कर (टीडीएस) वसूल लिया जाता है। लेकिन इन्हें घोषित करना होता है और उन पर निर्धारित कर भी अदा करना होता है।

शादी में मिले तोहफों का खुलासा करें , नही देना होगा कर !

Silver-gift-wedding.कई लोग तो उस आय की जानकारी भी नहीं देते, जो कर के दायरे में नहीं आती है। मिसाल के तौर पर कोई व्यक्ति म्युचुअल फंड में एक वर्ष तक निवेश करने के बाद उसे भुना लेता है अथवा शेयरों पर लाभांश अर्जित करता है। आयकर फॉर्म में कर से छूट वाली ऐसी आय के लिए अलग से सूची होती है और फॉर्म भरने वाले को उसका खुलासा करना चाहिए। कानून के मुताबिक यदि किसी व्यक्ति को रिश्तेदारों से इतर किसी व्यक्ति से 50,000 रुपये से अधिक कीमत का तोहफा मिलता है तो उस पर उसे कर अदा करना होगा। लेकिन इस मामले में भी कुछ रियायत हैं। उदाहरण के लिए शादी में मिले तोहफों का खुलासा तो करना होता है, लेकिन उन पर कर नहीं देना पड़ता।

मकानों का विवरण व किरायेदारी प्रकट करें !

house-डीबीओ इंडिया में निदेशक (प्रत्यक्ष कर) अमित अजमेरा आम तौर पर होने वाली एक अन्य गलती बताते हैं। इन दिनों तमाम करदाताओं के पास दो मकान होते हैं। दूसरा मकान किराये पर नहीं चढ़ा है तो भी उसके संभावित किराये का अनुमान लगाकर उस पर कर अदा करना होगा। मकान मालिक इलाके में किसी रियल एस्टेट ब्रोकर से किराये के

income-tax1  बारे में पता कर सकता है और कर अदा कर सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि रिटर्न दाखिल करने से पहले किसी भी व्यक्ति को फॉर्म 26 एएस देखना चाहिए, जो आयकर विभाग की ई-फाइलिंग वेबसाइट पर दिखता है। नियोक्ता द्वारा काटे गए कर के अलावा भी करदाता को टीडीएस के दूसरे उदाहरणों पर गौर करना चाहिए। यदि किसी बैंक अथवा अन्य संस्था द्वारा स्रोत पर कर कटौती इस फॉर्म में नजर नहीं आ रही है तो करदाता को उनसे बात कर जानकारी अद्यतन करानी चाहिए। अजमेरा कहते हैं कि वित्त वर्ष के बीच में नौकरी बदलने पर अक्सर लोग पुराने नियोक्ता से हुई आय को भूल जाते हैं। उस मामले में भी कर का हिसाब लगाने में फॉर्म 26 एएस काम आता है।

           आयकर रिटर्न की पूरी जानकारी लें!

income-tax-procedures-for-nris      विशेषज्ञ बताते हैं कि बहुत से वेतन भोगियों का अगर वेतन के अलावा कोई अन्य निवेश नहीं होता है तो वे आयकर रिटर्न ही नहीं भरते। लेकिन यदि आप आयकर के दायरे में आते हैं तो रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य है। रिटर्न दाखिल करने के बाद यह सुनिश्चित करना न भूलें कि उसकी जानकारी आयकर अधिकारियों को मिल गई हो। यदि आप ऐसा नहीं करते हैं तो आपका आयकर रिटर्न अमान्य हो जाएगा।

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