गोरखपुर सदर: कठिन है डगर पनघट की !

Gorakhpur : गोरखपुर सदर लोक सभा क्षेत्र से चुनावी जंग काॅॅफी दिलचस्प हो गई है। यद्यपि कि यहाॅ से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भाजपा के बैनर पर पिछले 6 बार भारी मतों से जीत दर्ज कर सदन पहुॅचते रहे हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हे यह सीट छोड़नी पड़ी। उपचुनाव हुआ और भाजपा ने पार्टी के तत्कालीन क्षेत्रिय अध्यक्ष उपेन्द्र दत्त शुक्ल को प्रत्याशी बनाया। विपक्ष लामबन्द होकर सपा प्रत्याशी प्रवीण निषाद का साथ दिया। प्रवीण, निषादों को अनुसूचित जाति का दर्जा दिलाने के लिये जातिय संघर्ष करते हुए राजनीतिक पार्टी बनानें वाले संजय निषाद के पुत्र हैं। पिछले उपचुनाव में चमत्कारी उलटफेर करते हुए उन्होने 21हजार 961 मतों से विजयश्री हासिल की। इस अप्रत्याशित पराजय के बाद भाजपा की हालत इतनी खराब हो गई कि उन्हें प्रत्याशी चयन के लिये लम्बा समय लग जाने के बाद भी भोजपूरी फिल्म अभिनेता रविकिशन के ग्लैमर पर भरोसा जताना पड़ा। हलांकि उपचुनाव के बाद योगी ने सभी रुकी परियोजनाओं को गति दे दी। शहर में बहुत तेजी से रोड चैड़ीकरण का काम होने लगा। स्वयं योगी ने गोरखनाथ मंदिर गेट को सड़क चैड़ीकरण हेतु तोड़ने की सहमति देकर लोगों के विरोध को दबा दिया। जबकि सभी जानते हैं कि दूसरी सरकारों में इसे तोड़ने के क्या परिणाम होते? रामगढ़ताल का सुन्दरीकरण हो अथवा असफाकउल्ला खाॅ चिड़िया घर का निर्माण हो, एम्स का निर्माण व ओपीडी का प्रारम्भ, खाद कारखाना निर्माण हो, यूथ को लुभाता वीर बहादुर सिंह स्टेडियम तथा उसमें खेले जानेवाला भारत – फ्रांस अन्तर्राष्ट्रीय हाकी मैच हो! योगी ने हर वर्ग को एक कुशल मुखिया होने का शुभ संदेश दिया। फिर भी वह खाई भर गई जो उपचुनाव में बनीं थी किसी भाजपाई को विश्वास नही हो रहा। स्वयं योगी भी स्पष्टरुप से किसी के उम्मीदवारी के लिये आगे नहीं आये। न ही गोरखपुर से ही कद्दावर केन्द्रिय राज्यमंत्री शिवप्रताप शुक्ल ही यह जिम्मा लेने को तैयार हुए। फिलहाल 18अप्रैल को गोरखपुर सदर से बहुचर्चित भाजपा प्रत्याशी सिने कलाकार रविकिशन का आगमन हो रहा है। वह अपना प्रचार प्रसार का प्रारम्भ करेंगे।
उधर सपा-बसपा गठबंधन के प्रत्याशी रामभुआल निषाद का जनसम्पर्क चल रहा है। काॅग्रेस ने इस सीट पर अपना पत्ता अभी तक नहीं खोला है। जबकि लोकसभा उपचुनाव विजेता प्रवीण निषाद भाजपा में शामिल होेकर संत कबीर नगर चले गये। निषाद समुदाय फिलहाल इस बात को उनका गोरखपुर से पलायन मान कर खफा है। बता दें कि निषाद वोट लगभग 4 लाख के करीब है जो लोकसभा में जातिय आधार पर सबसे बड़ी संख्या है। निषाद पार्टी बनाकर चुनावी आगाज का मन बना रहे प्रवीण के पिता संजय निषाद को आरक्षण की माॅग करते कसरवल कंाण्ड से बड़ा नेम-फेम हासिल हुआ था। इसमें एक युवक की गोली लगनें से मौत हो गई थी। उपचुनाव में सपा प्रत्याशी को इसका बहुत बड़ा राजनीतिक फायदा मिला था। इस बार प्रवीण भी भाजपा में हैं, इसलिये निषाद विकल्प विहीन हो रामभुआल की ओर देख रहे हैं। हलांकि काॅग्रेस यदि कोई दमदार प्रत्याशी उतारती है तो जीत की बाजी किसके हाथ लगेगी और रोचक हो जायेगा।