घर का तेल है शुद्ध, रिफाइंण्ड पर ना करें भरोसा !

 इंडियन हार्ट जर्नल खुलासा !

New Delhi : घरों में इस्तेमाल होने वाला घी, नारियल तेल और सरसों तेल जैसे खाना पकाने के पारम्परिक भारतीय तेल आधुनिक समय के रिफाइंड या जेतून के तेल से ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक हैं।indian hart विशेषज्ञ मानते हैं कि लोगों को आमतौर पर बाजार में उपलब्ध कई तरह के खाद्य तेलों से स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि खाना पकाने की भारतीय विधियों (जिनमें तलना शामिल है) में घी, नारियल तेल और सरसों तेल जैसे हमारे परंपरागत तेल स्वास्थ्य लाभों के मामले में ‘रिफाइंडÓ और अन्य तेलों से बेहतर हैं।

यह खुलासा इंडियन हार्ट जर्नल में किया गया है। इस जर्नल ने हार्ट पेसेण्ट को व छोटे बच्चोें को सरसो के तेल से दूरी बनाने की हिदायत देने वाले चिकित्सकों को पुन: विचार करने को विवश कर दिया है   । सदियों से चली आ रही बच्चों  को तेल  मालिश की परम्परा से; चिकित्सकों के परामर्श के कारण बीते कुछ दशक से वंचित रखा जाता रहा  है।  इसी तरह रिफाईण्ड को सरसों के तेल से बढ़िया बताकर हार्ट पेसेण्ट को उसे खाने से दूर रखा जाता रहा है।  इसमें बताया गया है कि रिफाइनिंग की प्रक्रिया में तेल को अत्यधिक तापमान पर गर्म किया जाता है जिससे उनका क्षरण होता है और जहरीले पदार्थ पैदा होते हैं। रिफाइंड तेल तेजी से खराब हो जाते हैं और इसलिए उन्हें तलने से बचना चाहिए। इसके उलट संतृप्त वसाओं (जैसे घी, नारियल तेल) को भारतीय व्यंजन पकाने में इस्तेमाल किया जा सकता है क्योंकि वे तलने के दौरान तुलनात्मक रूप से स्थिर रहते हैं।

Vaidambh Media