तुम्हे कुछ करना चाहिए,ये तुम्हारे भविष्य की दुनिया का सवाल है!

 चिर प्रकाश की अमर निद्रा मेें सो गये कलाम !

Dr APJ Abdul Kalam, Director Aerospace Research Group, Trivendrum and Launches/Vehicles ISRO, Bangalore delivered a lecture on "Development of Rocket Technology in India and Abroad" in Bombay on August 31, 1981. Express archive photo
August 31, 1981

एपीजे अब्दुल कलाम वैज्ञानिक थे,मगर व्यवहार में शिक्षक का आचरण और भिक्षुक की सादगी थी। उन्होंने राष्ट्रपति पद की गरिमा को एक नई भंगिमा दी  ।  कलाम की एक बड़ी खूबी  थी कि उनमें भारत की समन्वय की परंपरा अभिव्यक्त होती थी। वे कुरान और गीता, दोनों के उद्धरण दे सकते थे। वैज्ञानिक कलाम वीणा भी बजाते थे और उनमें एक गहरा आध्यात्मिक रुझान था। अपने कर्म और मर्म में हमेशा उन्होंने यही जताया कि शीर्ष पद पर होने का संवैधानिक ही नहीं, नैतिक अर्थ भी होता है। यह संदेश ओझल नहीं होना चाहिए।        

 New Delhi:  जुलाई 2002 में देश के ग्यारहवें राष्ट्रपति चुने जाने से पहले उनकी ख्याति एक वैज्ञानिक की थी । वे मिसाइलमैन कहे जाते थे । भारत को अंतरिक्ष में पहुंचाने और मिसाइल क्षमता से लैस करने में उनका बहुत महत्त्वपूर्ण योगदान था।

Scientific advisor to Prime Minister Dr APJ Abdul Kalam in Mumbai on 7.4.99. Express archive photo by Vinayaka Prabhu
Scientific advisor to Prime Minister Dr APJ Abdul Kalam in Mumbai on 7.4.99. Express archive photo by Vinayaka Prabhu

अपनी वैज्ञानिक उपलब्धियों के लिए देश के सर्वोच्च नागरिक अलंकरण ‘भारत रत्न’ से नवाजे गए कलाम ने वर्ष 1998 के पोकरण परमाणु परीक्षण में अहम भूमिका निभाई थी। वे वाजपेयी सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार रहे। उनका राष्ट्रपति चुना जाना इस बात का प्रतीक था कि कोई गैर-राजनीतिक पृष्ठभूमि का व्यक्ति भी राष्ट्र का प्रमुख हो सकता है। इसके साथ तत्कालीन वाजपेयी सरकार द्वारा उनके चयन के पीछे राजनीतिक पहलू शायद यह भी था कि गुजरात नरसंहार के बाद सौहार्द की राजनीति की स्थापना वक्त का अहम तकाजा थी। अकारण नहीं था कि पद ग्रहण करने के बाद कलाम ने सांप्रदायिकता की आग में दहकते गुजरात का दौरा किया, हालांकि सरकार इस दौरे के शायद हक में नहीं थी।

                        राश्ट् के अभिभावक

APJ KALAMभारत में राष्ट्रपति का पद अमूमन शोभा का पद माना जाता है। अन्य राष्ट्रपतियों की तरह कलाम ने इसका निर्वाह भी किया। लेकिन ऐसा भी अवसर आया जब सरकार को उसकी भूल का अहसास कराने से नहीं हिचके। मसलन, 2006 में उन्होंने लाभ के पद से संबंधित विधेयक, स्पष्टता की कमी रेखांकित कर, पुनर्विचार के लिए लौटा दिया था। इस पर उन्होंने तभी हस्ताक्षर किए जब विधेयक उनके पास दुबारा भेजा गया। कलाम ने न तो राष्ट्रपति भवन के तामझाम को अपने ऊपर हावी होने दिया न लोगों से दूरी बनाई।

        जाऊं तो भी शिक्षक के रूप में !

apj abdul  उन्होंने राष्ट्रपति भवन के दरवाजे आम लोगों के लिए खोलने की पहल की और हमेशा लोगों से संपर्क और संवाद बनाए रखा। यही वजह है कि वे जनता के राष्ट्रपति कहे गए। खासकर युवाओं से kalam_obitबातचीत में उन्होंने विशेष रस  आता था। उनके बीच वे सहजता से घुलमिल जाते, उनके प्रश्नों के उत्तर देते, उनकी जिज्ञासाएं शांत करते। अवाम में कलाम ने हमेशा अपने को एक शिक्षक के रूप में पेश किया। वे कहते थे, मैं शिक्षक ही रहना चाहता हूं। जाऊं तो भी शिक्षक के रूप में। वही हुआ। करीब चौरासी साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से जब वे सदा के लिए विदा हुए, शिलांग के राजीव गांधी भारतीय प्रबंध संस्थान में व्याख्यान दे रहे थे। व्याख्यान के दौरान ही उनके दिल ने धड़कना बंद कर दिया।

डॉक्टर कलाम के सहयोगी श्रीजन पाल सिंह ने उनके अंतिम दिन का ब्यौरा अपने फ़ेसबुक पन्ने पर पोस्ट किया है.

_kalam_last_day WITH srijanpalsingh  अनुवादित अंश  ….
हम 12 बजे गुवाहाटी के लिए विमान में सवार हुए. उन्होंने गहरे रंग का ‘कलाम सूट’ पहना हुआ था. हम ढाई घंटे की उड़ान के बाद शिलॉन्ग पहुँचे और एयरपोर्ट से कार से आईआईएम पहुँचने में ढाई घंटे और लगे. पाँच घंटे के इस सफ़र के दौरान हमने कई मुद्दों पर बात की. मैंने पिछले छह सालों के दौरान डॉक्टर कलाम के साथ सैकड़ों यात्राएं की हैं. हर यात्रा की तरह ये भी विशेष थी. इस दौरान हमने तीन ख़ास मुद्दों पर बात की.

अपनें अंतिम समय में देश की की तीन प्रमुख चिंता पर चर्चा करते रहे अंकल कलाम

मानवों को धरती छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है…

apj-abdul-kalam-with-studentsसबसे पहले वो पंजाब में हुए हमले में निर्दोष लोगों की मौत पर बेहद दुखी थे. आईआईएम शिलॉन्ग में उनके भाषण का विषय था, “जीने लायक धरती का निर्माण”. उन्होंने पंजाब की घटना को विषय से जोड़ते हुए कहा, “ऐसा लगता है कि मनुष्य निर्मित ताक़ते धरती पर जीवन के लिए उतना ही बड़ा ख़तरा हैं जितना प्रदूषण.” हमने इस बात पर चर्चा की कि यदि हिंसा, प्रदूषण और मनुष्यों की लापरवाहियां यूं ही चलती रहीं, तो कैसे मानवों को धरती छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है. उन्होंने कहा, “यदि ऐसा ही चलता रहा तो संभवतः तीस साल लगेंगे..तुम लोगों को इस बारे में कुछ करना चाहिए. ये तुम्हारे भविष्य की दुनिया का सवाल है.”

संसद में हंगामों पर चिंतित

parliament-बातचीत का दूसरा विषय भी एक राष्ट्रीय मुद्दा था. पिछले दो दिनों से डॉक्टर कलाम इस बात को लेकर चिंतित थे कि लोकतंत्र का सबसे बड़ा संस्थान संसद एक बार फिर काम नहीं कर पा रहा है. उन्होंने कहा, “मैंने अपने कार्यकाल में दो अलग-अलग सरकारें देखीं और उसके बाद भी कई सरकारें देखीं. काम में ये दखल होता ही रहता है. ये सही नहीं है. मुझे कोई ऐसा रास्ता निकालना ही होगा कि संसद विकास की राजनीति पर काम करे.”
इसके बाद उन्होंने मुझसे आईआईएम शिलॉन्ग के छात्रों के लिए एक प्रश्न तैयार करने के लिए कहा. ये उन्हें लेक्चर के बाद दिया जाना था. वे चाहते थे कि छात्र संसद को अधिक उत्पादक और जीवंत बनाने के विषय में सलाह दें. लेकिन कुछ देर बाद उन्होंने कहा, “मैं उनसे कोई हल सुझाने के लिए कैसे कह सकता हूँ जब स्वयं मेरे पास कोई हल ना हो.”

सुरक्षा में लगे जवान को सलाम

मृत्यु से कुछ मिनट पूर्व

उनकी तीसरी याद बेहद मानवीय है. हम 6-7 कारों के काफ़िले में सफ़र कर रहे थे. डॉक्टर कलाम और मैं तीसरी कार में बैठे थे. हमारे आगे एक खुली जीप थी जिसमें तीन जवान थे. दो जवान दोनों सिरों पर बैठे थे और तीसरा अपनी बंदूक तानें ऊपर खड़ा था. एक घंटे के सफ़र के बाद डॉक्टर कलाम ने पूछा- ‘वो खड़ा क्यों हैं. थक जाएगा. ये सज़ा देने जैसा है. क्या तुम वॉयरलैस पर ये संदेश दे सकते हो कि उसे बैठने के लिए कह दिया जाए.’ मैंने उन्हें समझाने की कोशिश की कि उसे सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खड़े रहने के निर्देश दिए गए हैं. लेकिन वो नहीं माने. हमने संदेश भिजवाया लेकिन वो जवान फिर भी खड़ा रहा. अगले डेढ़ घंटे की यात्रा के दौरान उन्होंने मुझे तीन बार याद दिलाया कि मैं हाथ का इशारा करके उससे बैठने के लिए कहूं. लेकिन अंततः उन्हें लग गया कि इस बारे में हम कुछ नहीं कर सकते और उन्होंने कहा कि मैं उससे मिलना चाहता हूँ और शुक्रिया अदा करना चाहता हूँ.

जब हम आईआईkalam-alvidaएम शिलॉन्ग पहुँचे तो मैंने सुरक्षा अधिकारियों से उस जवान के बारे में पूछा. जब वो मुझे मिल गया तो मैं उसे अंदर ले गया. डॉक्टर कलाम ने उसका हाथ मिलाकर अभिवादन किया और शुक्रिया कहते हुए पूछा कि तुम थक तो नहीं गए हो, क्या तुम कुछ खाना चाहोगे. डॉक्टर कलाम ने उससे कहा, “मैं माफ़ी चाहता हूँ मेरी वजह से तुम्हें इतनी देर खड़ा रहना पड़ा.” उस जवान ने बस इतना ही कहा, “सर आपके लिए तो छह घंटे भी खड़े रहेंगे.”

अंकल कलाम के  अंतिम शब्द …!

apj_abdul_kalam_
इसके बाद हम लेक्चर हॉल में पहुँचे. वो लेक्चर के लिए लेट नहीं होना चाहते थे. उन्होंने कहा, “छात्रों से कभी इंतेज़ार नहीं करवाना चाहिए.” मैंने जल्दी से उनका माइक सेट किया, लेक्चर के अंतिम रूप के बारे में ब्रीफ़ किया और कंप्यूटर पर आ गया. जब मैं उनका माइक लगा रहा था तो उन्होंने हँसकर कहा, “फ़नी गॉय, क्या तुम ठीक हो.” मैंने मुस्कराते हुए कहा, “हाँ.”  वो उनके अंतिम शब्द थे. भाषण शुरू होने में दो मिनट थे. मैं उनके पीछे बैठा था. एक लंबी ख़ामोशी के बाद मैंने उन्हें देखा, वो नीचे गिर गए..!
हमने उन्हें उठाया, जब तक डॉक्टर पहुँचते हमने वो सबकुछ किया जो हम कर सकते थे. मैं उनकी तीन-चौथाई बंद आँखों को कभी नहीं भूल सकता. मैंने एक हाथ से उनका सिर संभाला और उन्हें होश में लाने की हर संभव कोशिश की. उनके हाथ जकड़े और मेरी उंगली में फँस गए. उनका चेहरा स्थिर था और उनकी सुलझी हुई अचल आँखों से ज्ञान का प्रकाश निकल रहा था. उन्होंने एक भी शब्द नहीं कहा. न ही कोई दर्द प्रदर्शित किया. सिर्फ़ उनका मक़सद साफ़ झलक रहा था. पाँच मिनट के भीतर हम नज़दीकी अस्पताल में थे. अगले कुछ मिनटों में उन्होंने बता दिया कि मिसाइलमैन उड़ गया है, हमेशा के लिए.

                                                Vaidambh Media