प्रतिबंधित किताबें जो भरत में नही बिकती !

New Delhi: हर किताब व हर बात समाज स्वीकार कर ले ऐसा नही है। कभी -कभी सही बात भी भीड़ बर्दाश्त नही करती !pratibandhit book लेखक काल व परिस्थिति को अपने लिये चुनौती मानकर चलता है। जरुरी नही कि जो उसे दिख रहा हो वह अन्य की भी निगाह मे आये। विचारक तो अपने विचार बिना लिखे रह नही सकता पर उसे अपने इस गुण के कारण जीवन में बहुत कष्ट भोगने पड़ते है। भारत  देश अलग-अलग भाषाओं और कहानियों के लिए जाना जाता है और यही कारण है कि यहां लिखने और पढ़ने वालों की भी कोई कमी नहीं है लेकिन कई बार ऐसा होता है कि लिखने वाले कुछ ऐसा लिख जाते हैं जिससे बवाल खड़े हो जाते हैं, जिसमें धर्म से लेकर कई तरह के विवाद होते हैं। आज हम आपको कुछ ऐसे ही लेखकों और किताबों के बारे में बता  रहे हैं जिन पर भारत सरकार ने बैन लगा रखा है…

 सबसे ज्यादा कॉन्ट्रोवर्सियल किताब रही मदर इंडिया !

दुनिया के मशहूर लेखकों में शामिल सलमान रुश्दी द्वारा लिखी गई यह उनकी चौथी किताब है।salman rusdi इस किताब को यूके में बहुत सराहा गया और यह बुकर प्राइज के लिए भी नॉमिनेट हुई इसके अलावा 1988 में व्हिटब्रेड नॉवल ऑफ द ईयर अवार्ड से भी नवाजा गया। हालांकि इस किताब के एक धर्म के गुरू पर आधारित होने के कारण कड़ी आलोचना भी हुई लेकिन इस किताब के कारण लेखक सलमान रश्दी का खूब प्रचार हुआ। इस किताब पर भारत समेत कई देशों में प्रतिबंध लगाया गया। ब्रिटीश शासन के दौरा मदर इंडिया सबसे ज्यादा कॉन्ट्रोवर्सियल किताब रही। इस किताब को अमरीकान इतिहासकार कैथरीन मायो ने लिखा था। कैथरीन भारत में अपने शोध कार्य के लिए आई थीं उन्होंने अपने रिसर्च के दौरान इस किताब को लिखा। इस किताब में भारत में महिलाओं के साथ हो रहे बर्ताव, छुआछूत, गंदगी, राजनैतिकों के चरित्र के बारे में लिखा गया था। जिसके कारण भारतीय लोगों द्वारा इसका विरोध करने के बाद इस किताब पर बैन लगा दिया गया।

प्रतिबंधित किताब है  बिजनेस टायकून धीरूभाई अंबानी की बायोग्राफी !
‘द रामायना’  ; हिंदू धर्मग्रंथ रामायण का उपहास उड़ाने वाली इस किताब पर प्रतिबंध लगा दिया गया। उन्होंने रामायणा के पात्रों को लेकर हल्के फुल्के तरीके से सटायर लिखा था।book इसके अलावा हिंदू धर्म के भगवान राम का भी मजाक उड़ाया गया था। इस किताब पर काफी विरोध के बाद 1956 में प्रतिबंधित कर दिया गया। ‘द पाॅलिस्टर प्रिंस’  यह किताब भारत के बिजनेस टायकून धीरूभाई अंबानी की बायोग्राफी थी। जिसे ऑस्ट्रेलियन जर्नलिस्ट हमीश मैक्डॉन्लड ने लिखा था जिसने यह दावा किया था कि उन्होंने इस किताब को लिखने से पहले अंबानी के सभी करीबी नेताओं का पर्सनल इंटरव्यू किया है। इसमें अंबानी के भारत सरकार के शामिल होने और वहां उनके प्रभावों को बताया गया था। जिसके कारण इस किताब पर बैन लगा दिया गया। इस किताब को सुनंदा के दत्ता रे ने लिखा है जो सिक्किम के राजा के रूप में भी जाने जाते हैं। इस किताब मे भारत और चीन के सिक्किम को पाने के षणयंत्रों के बारे में और राजा के स्ट्रगल एंव भारत सरकार द्वारा सिक्किम पर राज स्थापित करने की कहानी बताई गई है। सिक्किम के विलय के बारे में लिकने के कारण इस किताब पर बैन लगा दिया गया।

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