बरिश से डूबनेवाले शहर की सुधि कब लोगे सीएम साहब !

yogi-uttar-pradesh-cm  जल का कुप्रबंधन !
गोरखपुर !  उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री के संसदीय क्षेत्र में जल का कुप्रबंधन कई दशक से दुनिया के गये-गुजरे जल प्लावित क्षेत्रों से किसी भॅाति कम नहीं है। यहा पेय जल, भूगर्भ जल, वर्षा जल और जल निकास सबका प्रबंधन बेतरतीब है। गोरखपुर शहर के पूर्वोत्तर क्षेत्र में नगर-निगम के वार्ड न0 8, सिंघड़िया ,सरयूनहर कालोनी से तुर्रा नाले तक 6 किमी लम्बे नाले का निर्माण 16करोड़ 5 लाख13 हजार रुपये बजट के साथ वर्ष 2013 में प्रारम्भ हुआ जो अब तक अपने निर्धारित लक्ष्य का आधा हिस्सा भी पूरा नहीं कर पाया है। जबकि यह क्षेत्र बारिश के मौसम में जल प्लावन का चैथा साल पूरा करने जा रहा है। वर्षों हीला-हवाली कर ऐन बरसात के मौसम में यहॅा निर्माण कार्य तेज कर दिया गया है। 7 करोड़ 51 लाख 33 हजार रुपये बजट का दूसरा नाला भी इसी क्षेत्र मे पूरब-दक्षिण छोर पर 10 जून 2013 को पास कर दिया गया। विपक्ष का दावा है कि 2013-14 में 36 फिसद् नालें का निर्माण कर लिया गया था। अब लापरवाही हो रही है। दोनो नाले के निर्माण की कार्यदायी संस्था सीएनडीएस है।
ठेकेदारों के मनमानेपन की सहयोगी है मानिटरिंग अथारिटी !

gorakhpur1शहर में जिम्मेंदार निर्माण एजेंसियाॅ कभी भी निर्धारित अवधि में कार्य पूरा नहीं कर पातीं। यह भी जल प्लावन का प्रमुख कारण है। ज्यादातर ठेकेदार  निर्माण कार्य के लिये बरसाती मौसम के प्रिय होते हैं। जाहिर है चाहे जो  भी हो वह कार्य निर्धारित समय सीमा के बजाय मनमाने वक्त पर ही करेंगे। यहाॅ मानिटरिंग अथारिटी उनके मनमानेपन का भरपूर समर्थन करतीं हैं।
नगर की दुर्दशा से परिचित हैं मुख्यमंत्री !
माना जा रहा था कि मुख्यमंत्री का शहर होने के नाते गोरखपुर में वर्षों से ठप विकास कार्य की गति विद्युत स्तरीय होगी! पर यहाॅ पूर्व व वर्तमान शासन पद्धति में कोई अंतर नहीं दिख रहा। नगर की स्थिति को वर्तमान मुख्यमंत्री व सदर सांसद तथा सम्मानित गोरक्षपीठ के महंथ योगी आदित्यनाथ पिछले 3दशक से इन सभी समस्यों को नजदीक से ना केवल देख-समझ रहे हैं अपितु सड़क से सदन तक इन समस्याओं के स्थाई समाधान के लिये संघर्ष भी करते रहे हैं। सीएम बनने के बाद सरकार के प्रथम बजट में मेट्ो रेल को प्राथमिकता देने पर ं जल प्लावन झेल रहे लोंगों को घोर निरासा हुई है।  योगी इस शहर की आधारभूत ब्यवस्था को 3 दशक से बखूबी जानते-पहचानते और समझते हैं।इस पर काबू पाने व समस्या समाधान करने का नगर -निगम की सदन, विकास प्राधिकरण व जिला योजना आयोग की बैंठके में दम्भ भरते कई बार देखा गया । इन बैठकों के रजिस्टर इसकी गवाही कर रहे हैं। शहर में हल्की बारिश हुई नहीं कि ये सारे मिनट्स व दावे पिछले कई दशक से जल प्लावन का मजाक बनके रह जाते हैं।
पंगु हेा गई हैं नगर निर्माण की इकाईयां !

gorakhpurहलांकि सरकार के नगर नियोजन का कार्य भार सम्भालने वाली कई एजेंसिया यहाॅ भी अन्य शहरों की भाॅति बकायदा कार्यालय व वेतनभोगी कर्मचारियों के साथ शोभा बढ़ाते मिल जायेंगे। इनमें नगर-निगम , गोरखपुर विकास प्राधिकरण का नाम प्रमुख है। हलांकि नगर र्निमाण में आवास विकास कालोनी , डूडा जैसी संस्थायें भी यहां मौजूद हैं जिन्होने नगर निर्माण में अपना योगदान दिया है।  फिर भी यह शहर एक घण्टे की बारिश में  अपने 70 वार्डों के साथ डूबने लगता है।
हल्की बारिश में भी डूब जाते हैं दर्जानों मुहल्ले !
अब तो पूर्व में सत्ता की मलाई काटने वाले भी अपने को बेहतर बताते हुए शिकायती हो गये हैं। गत दिनों हुई दो घण्टे की बारिश में जिले के मौसम विभाग सहित आवास विकास कालोनी, फ्रेण्ड्स कालोनी, गिरधरगंज, छतरहिया, कमलेशपुर, रानीडिहा, एमएमएम टेक्निकल विश्वविद्यालय, सरयू नहर कालोनी ,खाले टोला, निर्माणाधीन एम्स क्षेत्र देवरिया राजमार्ग सहित दर्जनों मुहल्लों में दो दिनों तक पानी भरा रहा।
विशेषज्ञ , बेतरतीब गैर तकनीकी निर्माण का आरोप लगा रहे हैं। सिंघड़िया मुहल्ले में रहने वाले सेवानिवृत अभियंता ने आरोप लगाया कि कई स्थानों  पर खुदाई करके छोड़ दिया है। पानी का निकास बिना तय किये कहीं ऊंचा कहीं नींचा निर्माण जारी है। बिना प्रारम्भ से अंत तक तल और ढलान लिये जल निकास सुचारु नहीं हो सकता। सड़क से ऊपर होने के कारण जल जमाव का पानी नालें में सीधे नहीं पहुंच पायेगा। यह समस्या लगातार बनी रहेगी।

hiralal yadavवार्ड न0 8 के पूर्व सभासद व वर्तमान पार्षद पति (स्वघोषित पद) हीरालाल यादव कहते हैं कि, “ हमने अथक प्रयास करके सपा सरकार में यह नाला पास करवाया ताकि जनता को बरसात  में जल जमाव से छुटकारा मिल जाये। पर यह भी यहाॅ  के  भाजपाई जन प्रतिनिधियों को देखा नहीं गया। नगर विधायक ने अकारण ही वर्षाें तक निर्माण को बाधित रखा। आज सरकार में  हैं , मुख्यमंत्री हमारे सदर क्षेत्र के सांसद  हैं वह जल जमांव पर बहुत- बहुत धरना प्रदर्शन किये हैं , समस्याओं को करीब से जानते हैं फिर भी लापरवाही हो तो अब कहाॅं से विकास पुरुष अवतरित होगा ! नगर विधायक को नाले की गुणवत्ता व मिट्टी की रखवाली आज भी उसी तन्मयता से करनी चाहिए जैसा सपा के शासन काल में कर रहे थे।” हीरालाल का दावा है कि सपा की सरकार में 36 फिसद् निर्माण कर लिया गया था। रानीडिहा निवासी अंगद कहते हैं कि मुख्यमंत्री चाहें तो निर्माण इसी बरसात में पूर्ण कर लिया जाय। पार्षद से लेकिन मेयर व सांसद सब राजनीति कर रहे हैं।
क्या सचमुच जनता का हित जन प्रतिनिधि  या नेता नहीं चाहते ! ये बात गोरखपुर शहर में जल जमाव के मुद्दे पर बेझिझक कही जा सकती है “ हाॅ “ ।

    DHANANJAY

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