शिल्पकला का नायाब नमूना इकंतेश्वर महादेव मंदिर

चौसठ योगिनियों के बारे में सुना  है ! मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में चौसठ योगिनियों का एक मंदिर है. इनका एक मंदिर जबलपुर में भेड़ाघाट के पास भी है. वही मुरैना जो गजक की मिठास और बीहड़ों की भयावहता के लिए प्रसिद्ध है. इसके जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर है मितावली और वहीं है यह मंदिर. अंग्रेज़ आर्किटेक्ट सर हरबर्ट बेकर ने इसी के आधार पर भारत के संसद भवन की डिज़ाइन की परिकल्पना प्रस्तुत की थी. वैसे अगर आपको अपने गिरोह से कुजात किए जाने का ख़तरा हो तो अपनी सुविधा के लिए आप यह भी मान सकते हैं कि यह सिर्फ़ एक कहानी है. और अगर इसमें कुछ सच है तो वह यह है कि 14वीं सदी से पहले यह मंदिर 20वीं सदी में लुटियन और बेकर साहब की डिज़ाइन देखकर उन्हीं के औजारों से बनाया गया और बाद में एक कहानी गढ़ ली गई. बहरहाल, मानें आप कुछ भी, देखने का लुत्फ़ तो ले ही सकते हैं.

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चौंसठ योगिनी मंदिर एक दृष्टि में-
• निर्माण काल : नवीं सदी
• स्थान : मितावली, मुरैना (मध्य प्रदेश)
• निर्माता : प्रतिहार क्षत्रिय राजा
• ख़ासियत : प्राचीन समय में यहां तांत्रिक अनुष्ठान होते थे
• आकार : गोलाकार, 101 खंभे कतारबद्ध हैं। यहां 64 कमरे हैं, जहां शिवलिंग स्थापित है।
• ऊंचाई : भूमि तल से 300 फीट
   घुमक्ड़ / Bureau : ग्राम पंचायत मितावली, थाना रिठौराकलां, ज़िला मुरैना (मध्य प्रदेश) में यह प्राचीन चौंसठ योगिनी शिव मंदिर है। इसे ‘इकंतेश्वर महादेव मंदिर‘ के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर की ऊंचाई भूमि तल से 300 फीट है। इसका निर्माण तत्कालीन प्रतिहार क्षत्रिय राजाओं ने किया था। यह मंदिर गोलाकार है। इसी गोलाई में बने चौंसठ कमरों में हर एक में एक शिवलिंग स्थापित है। इसके मुख्य परिसर में एक विशाल शिव मंदिर है। भारतीय पुरातत्व विभाग के मुताबिक़, इस मंदिर को नवीं सदी में बनवाया गया था। कभी हर कमरे में भगवान शिव के साथ देवी योगिनी की मूर्तियां भी थीं, इसलिए इसे चौंसठ योगिनी शिवमंदिर भी कहा जाता है। देवी की कुछ मूर्तियां चोरी हो चुकी हैं। कुछ मूर्तियां देश के विभिन्न संग्रहालयों में भेजी गई हैं। तक़रीबन 200 सीढ़ियां चढ़ने के बाद यहां पहुंचा जा सकता है। यह सौ से ज़्यादा पत्थर के खंभों पर टिका है। किसी ज़माने में इस मंदिर में तांत्रिक अनुष्ठान किया जाता था। मौजूदा समय में भी यहां कुछ लोग तांत्रिक सिद्धियां हासिल करने के लिए यज्ञ करते हैं।

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मध्यपदेश के खजुराहो शिव सागर तालाब के पश्चिम की ओर स्थित चौसठ योगिनी मंदिर यहां को बेहद पाचीन मंदिर देवी काली को समर्पित है .ग्रेनाईअ पत्थर का पूर्णतः बना हुआ यह मंदिर अपने आप में सौदर्य और अभिभूति का नायाब नमूना है। मंदिर की सुदरता को बाहर से ही निहारा जा सकता है। इस मंदिर में 64 बाह्य मंदिर हैं और जिनमे पहले 64 योगिनी थी उनमे से कुछ बाद में चोरी हो गयी अब इसमें से केवल 35 ही बाकी हैं जहां तांत्रिक विविध पकार के अनुष्ठान कर चौसठ योगिनियों को पसन्न कर जागृत करते थे।
मंदिर में एक महाकाली की मूर्ति मौजूद है बाकी में काली की सहचर अन्य चौसठ योगिनियों की मूर्तियां पतिष्ठित की गयी है। वर्तमान में मंदिर की सभी कोठियां खाली है। और यहा पर किसी भी पकार का कार्य नही किया जाता है। लेकिन चंदेल राजाओं के समय यहां तांत्रिको द्वारा अनुष्ठान किये जाते थे। इसलिये इस मंदिर का नाम चौसठ योगिनी मंदिर पडक्वा। खजुराहो में यह मंदिर अपने आप में अद्भूत शिल्पकला का नायाब नमूना है।

योगाभ्यास करने वाली स्त्री को योगिनी या योगिन कहा जाता है। पुरुषों के लिए इसका समानांतर योगी है। भारत में चार प्रमुख चौसठ-योगिनी मंदिर हैं। दो ओडिशा में तथा दो मध्य प्रदेश में।