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व्यवहारिक धरातल पर मानवाधिकारों की जन जागरूकता

  प्रकृति ने सभी जीवों का सृजन कर उन्हे जीवन जीने का अधिकार प्रदान किया है। इस सृजन का सबसे अद्भुत जीव मनुष्य है। मनुष्य , प्रकृति के
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इंसेफेलाइटिस पर राजनीति के बजाय हो ठोस पहल.

1 से 15 वर्ष के बच्चो को संक्रमण का खतरा तीन दशक बाद भी स्वास्थ्य सेवाओं में फिसडडी है पूर्वांचल  आजाद भारत के लोकतांत्रिक व्यवस्था में तीन चीजें उपहार
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वर्तमान शिक्षा और शिक्षक

स्वामी विवेकानन्द ने कहा था -”शिक्षा की व्याख्या, शक्ति के विकास के रूप में की जा सकती है । शिक्षा मनुष्य की अन्तर्निहित पूर्णता की अभिव्यक्ति है।“ शिक्षा
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